हॅपी वुमन्स डे

आज मेरी कामवाली बाई के हाथ पे मार लगी थी।जैसे मुझे पता चला मैने उसे कहा "तू कुछ दिन काम पर मत आना पहले डाॅक्टर के पास जाकर इलाज करना"। वो बोली "ताई आपका अकेली का काम थोडी करती मै?,आप जैसे सब नही समझ के लेते।वो सुषमा ताई को कल महिला दिवस समारोह मे जाना है,मै नही जाऊंगी काम पर तो गुस्सा हो जाएगी वो!!
कितनी अजीब बात है ना?दरअसल महिला दिवस पर हम महिलाओंके सामाजिक, राजनीतिक अधिकार और तरक्की का जश्न मनाते
लेकिन ऐसी कितनी महिलाए है जिन्हे यह बात पता है?
आज महिलाए हर मामले मे आत्मनिर्भर और स्वतंत्र है।पुरुषोंके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।अपना घर और समाज मे समान रूप से अपना योगदान देने मे सक्षम बन रही है।घर और दफ्तर दोनो जगह कुशलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रही है
भारतीय संस्कृति में जहाँ आदिशक्ति महामाया, पार्वती जैसी देवी-देवताओंकी पूजा की जाती है,कहा जाता है जहाँ नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते है।गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा जैसी विदुषीओंकी भूमी है ये।वैदिक काल से महिला ,महिलाओंकी असामान्य बुध्दीमत्ता को यहाँ सराहना मिली है।परन्तु वर्तमान में जो हालात दिखाई दे रहे है उसमे महिलाओंको हर जगह अपमानित किया जा रहा है!!!!!
आज भी ग्रामीण रुढ़िवादी समाज मे बेटी पैदा होना शर्म की बात है।आज भी पढी लिखी होने के बावजूद महिलाओंकी जिंदगी चुल्हेचौके तक सिमित है।आज भी घर कें अहम निर्णय लेते हुए घर मे औरत की राय लेना जरूरी नही समझा जाता।डावरी दहेज जैसी प्रथाओंके चलते बेटीओंकी शादियाँ नही हो पा रही है तो कहींपर शादीके बाद बहू-बेटियों की आत्महत्या खून जैसी वारदात घट रही है।
सावित्रीबाई फुले,विजयालक्ष्मी पंडित, सरोजिनी नायडू,अमृता प्रीतम, इंदिरा गांधी,मेधा पाटकर जैसी महिलाओंने समाज मे महिलाओंके सम्मान प्राप्ती के लिए अधिकारोंके लिए शिक्षा केलिए अथक परिश्रम किए है।जिस के चलते इन्होंने अपने घरबार फूँके है।
सोशल मिडिया परme too अभियान के तहत महिलाओंका शोषण और यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई गई है।
आज महिला दिवस है।सोशल साइट्स पे हमे महिलाओंके सम्मान में लिखे गए बहुत सारे पोस्ट पढने मिलेंगे।महिलाओंकी किटीपार्टी, पिकनिक की तस्वीरे देखने मिलेगी।बाहर हर जगह महिला दिवस पर विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा।पर क्या हमे किसी एक दिन या एक सप्ताह के सेलिब्रेशन से ही खुश होना है।
आज महिलाए हर क्षेत्र में आगे बढ रही है।
यहाँ आय पी एस किरन बेदी है,यहा फ्लाइंग ऑफिसर गुंजन सक्सेना है।पर अफसोस यहा निर्भया, आरूषि और आयशा भी है।
अभीभी बहुत सारी उड़ाने बाकी है,बहुत सारी लड़ाइयां हमें जितनी है!!!!!!!
                            
                               वृषाली रूख्सार 🌸






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