मेनोपाॅज
@वृषाली रूख्सार 🌸
भगवान!!!"
आज बहुत ही देर से आँख खुली उसकी।सुबह का ब्रेकफास्ट बनाना है,शेखर यानि उसका पति उसके टिफिन की तय्यारी,ढेर सारे घर के काम,कैसे होगा सब टाइम पे?
बिस्तर से उठकर जमीन पर पैर रखी वैसी ही थोडी चक्कर सी आ गई। सुबह के बहुत सारे काम बाकी थे।
जल्दीसे ब्रेकफास्ट तय्यार करके डायनिंग टेबल पर लगा दी। उसमे भी शेखर का ब्रेकफास्ट अलग उसकी बेटी स्नेहा का ब्रेकफास्ट अलग, बेटे तन्मय का अलग। सच तो आज उस में काम करने की हिम्मत ही नही थी।फिर भी इतना सबकुछ जल्दी से बना दी।लेकिन पति के लिए ऑमलेट बनाई उसमे नमक डालना भूल गई तो स्नेहा के ज्यूस मे शक्कर डालनेकी रह गई, जल्दी जल्दी मे चाय बनाई वो भी रोज की तरह नही बनी।
हो गया!!!!!यहा पतिदेव नाराज हुए ब्रेकफास्ट आधे में छोड़कर चले गए, वहां से स्नेहा चिल्लायी "मम्मी,ज्यूस कैसा टेस्ट लेस बना है"।समझ नही आ रहा था सविता को पति की नाराजगी,बेटी का गुस्सा,सविता की आँखो मेआँसू आ गए।
पिछले कुछ दिनोंसे यही सब हो रहा था उसके साथ। रात को ठिक से सो नही पाती थी,घबराहट, पसीना,दिल का धडकना,
चक्कर आना,थकान समझ नही आ रहा क्या हो रहा है।इन सबके चलते काम मे लापरवाही,चिड़चिड़ापन बेचारी करती भी क्या?शेखर कहता क्या हो गया है आजकल तुझे?बच्चे कहते "मम्मी का तो कुछ समझ में ही नही आता।किसी भी बात पर चिढ़ते है ,रोते है ,कितनी खिटपिट करते पूरा दिन"।
हर घर सेकभी ना कभी तो इस तरह की बाते हमे सुनने मिलेंगी। असल मे सविता का मेनोपाॅज शुरू हो गया था।मेनोपाॅज (रजोनिवृत्ति),स्त्री का मासिक धर्म बंद होने का समय। उम्र के45 से 55 सालतक यह कभी भी हो सकता है।यह अपनी अपनी शरीर प्रकृति के उपर निर्भर करता है।यह कोई बिमारी नही है।एक शारीरिक गतिविधि है,जिस के चलते महिलाओंको कुछ शारीरिक और मानसिक बदलाव का सामना करना पडता है।यह एक नार्मल प्रक्रिया है।
मेनोपाॅज शुरू होने से पहले और बाद मे(प्रि और पोस्ट मेनोपाॅज)अपनी शरीर प्रकृति के अनुसार उनमे कई सारे शारीरिक और मानसिक बदलाव आ जाते है।हार्मोनल चेंजेस कि वजह से कभी पिरिएड कम आना कभी बहुत जादा फ्लो होना,हाॅट फ्लशेस,बेचैनी,सिरदर्द ,चक्कर आना,थकान होनाऔर इन सब के चलते मूड बदलना,काॅन्संट्रेशन,डिप्रेशन जैसी समस्या हो जाती है।
हर किसी की शरीर प्रकृति अलग रहती है,उसके अनुसार किसीके लिए यह ज्यादा तकलीफदेह होता है तों किसीके लिए कम।
ऐसे समय मे उस महिला को मानसिक आधार की जरूरत होती है।घर के लोगोंका उसे समझ के लेना जरूरी होता है।उस महिला को भी किसी अच्छे गायनोकोलोजिस्ट की सलाह से मेडिकल ट्रीटमेंट लेनी चाहिए।ताकि अपनी सेहत का अच्छा ध्यान रख सके।ऐसे समय मे कैल्शियम ,मल्टीविटॅमिन दवाईयां डाॅक्टर की सलाह से लेना कारगर साबित होती है।मनःशांती के लिए योग प्राणायाम या कोई भी एक्टिविटी नियमित रूप से करनी चाहिए। साथ-साथ अपने खानपान का भी ध्यान रखना चाहिए ताकि मेनोपाॅज का यह एक से दो साल का सफर आराम से कट जाए।
अच्छे पढेलिखे घरों में भी मेनोपाॅज जैसी समस्याग्रस्त महिलाओंको समझने मे उदासीनता दिखाई देती है।महिलाए हमारे घर का स्ट्राँग सपोर्ट सिस्टम होती है,उसके ऐसे नाजुक वक्त मे हमे भी तो उसका सपोर्ट सिस्टम बनना चाहिए।है ना?😊
वृषाली रूख्सार 🌸
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